महाराष्ट्रः शुरू हुई कांग्रेस की नखरेबाजी कांग्रेस ने 28 दिसंबर को अपने 136वें स्थापना दिवस पर महाराष्ट्र में एकाएक आक्रामक रुख ...
कांग्रेस ने 28 दिसंबर को अपने 136वें स्थापना दिवस पर महाराष्ट्र में एकाएक आक्रामक रुख दिखाते हुए अपने गठबंधन के घटक दल शिवसेना को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के स्थायित्व का जिम्मा कांग्रेस पर ही नहीं है. इसके दो प्रमुख नेताओं—लोक निर्माण कार्य मंत्री अशोक चव्हाण और प्रचार समिति के अध्यक्ष नसीम खान—ने शिवसेना से कहा कि वह उसके आंतरिक मामलों में दखलअंदाजी न करे. तीन दिन बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजी नगर किए जाने के प्रस्ताव की आलोचना की, यह भी कहा कि उसे अन्य पार्टी की राजनीति में नहीं घसीटा जाना चाहिए.
कांग्रेस नेताओं ने समय के गुणा-गणित के हिसाब से यह गुस्सा जताया है. महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव फरवरी में होने हैं, इसलिए पार्टी के लिए यह सही समय है कि वह धीरे-धीरे घटती अपनी हैसियत को फिर से उठाने की कोशिश करे. चव्हाण ने कहा कि वे शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत की ओर से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार को युनाइटेड प्रोग्रेसिव एलायंस (यूपीए) का अध्यक्ष बनाए जाने का समर्थन किए जाने से नाराज हैं. यह पद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास है. पर नाराजगी की असल वजह यह है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे लोक निर्माण विभाग की पूरी तरह उपेक्षा करते आ रहे हैं. चव्हाण मराठों के आरक्षण के लिए बनी कैबिनेट की एक उप-समिति के भी प्रमुख हैं. उन्हें लगता है कि उन्हें जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट में इस कदम का बचाव करने में राज्य की विफलता के लिए बलि का बकरा बनाया जा रहा है.
No comments